श्रीरामचरितमानस में विवेकवान नेतृत्व और निर्णय क्षमता का अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i3.24Keywords:
श्रीरामचरितमानस, विवेकवान नेतृत्व, निर्णय क्षमता, लोककल्याणAbstract
भारतीय ज्ञान परंपरा में श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक एवं साहित्यिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानवीय आचरण, कर्तव्यबोध, नैतिक विवेक और आदर्श नेतृत्व के विविध आयामों को समझने का महत्त्वपूर्ण स्रोत भी है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित इस ग्रंथ में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण, हनुमान और विभीषण जैसे पात्रों के माध्यम से विभिन्न परिस्थितियों में निर्णय लेने, कर्तव्य एवं व्यक्तिगत हित के बीच संतुलन स्थापित करने तथा नैतिक संकटों का समाधान करने की प्रेरणा मिलती है। प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य श्रीरामचरितमानस में अभिव्यक्त विवेकवान नेतृत्व की अवधारणा का विश्लेषण करना तथा नैतिक द्वंद्वों के समाधान में उसकी भूमिका को स्पष्ट करना है। अध्ययन के लिए गुणात्मक, वर्णनात्मक एवं व्याख्यात्मक शोध-पद्धति अपनाई गई है। इसमें ग्रंथ के चयनित प्रसंगों का पाठ-विश्लेषण करते हुए सत्यनिष्ठा, धर्मपालन, आत्मसंयम, परामर्श, करुणा, उत्तरदायित्व और लोककल्याण जैसे मूल्यों की विवेचना की गई है। अध्ययन से यह प्रतिपादित होता है कि विवेकवान नेतृत्व केवल निर्णय लेने की क्षमता नहीं, बल्कि निर्णय के नैतिक औचित्य, उसके परिणामों तथा उससे प्रभावित व्यक्तियों के प्रति उत्तरदायित्व को समझने की प्रक्रिया है। वर्तमान शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक जीवन में इन मूल्यों का समावेश नैतिक नेतृत्व के विकास में सहायक हो सकता है।



