सावित्रीबाई फुले के सामाजिक सुधार एवं महिला मुक्ति संबंधी विचारों का विश्लेषण
DOI:
https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i3.18Keywords:
सावित्रीबाई फुले, सामाजिक सुधार, महिला मुक्ति, महिला शिक्षा, लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण।Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र में उन्नीसवीं शताब्दी की महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् एवं महिला सशक्तीकरण की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले के सामाजिक सुधार तथा महिला मुक्ति संबंधी विचारों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य महिला शिक्षा, सामाजिक समानता, जातिगत भेदभाव के विरोध तथा स्त्री स्वतंत्रता के क्षेत्र में उनके योगदान को स्पष्ट करना है। सावित्रीबाई फुले ने महात्मा ज्योतिराव फुले के सहयोग से बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित किया तथा तत्कालीन समाज में प्रचलित रूढ़िवादी परंपराओं, अस्पृश्यता, बाल-विवाह और महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार का विरोध किया। उन्होंने शिक्षा को महिलाओं की आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान तथा सामाजिक मुक्ति का प्रभावशाली माध्यम माना। प्रस्तुत अध्ययन में उनके जीवन, शैक्षिक कार्यों, सामाजिक संघर्षों तथा महिला अधिकारों संबंधी विचारों का वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक विवेचन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सावित्रीबाई फुले के विचार केवल तत्कालीन सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं थे, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज में लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण तथा समावेशी शिक्षा की अवधारणाओं के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।



