कौटिल्य का राज्य सिद्धांत और आधुनिक शासनः एक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i3.17Keywords:
कौटिल्य, राज्य सिद्धांत, सप्तांग सिद्धांत, आधुनिक शासन, सुशासन, प्रशासनिक दक्षता, लोककल्याणAbstract
प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन में कौटिल्य का राज्य सिद्धांत शासन, प्रशासन, आर्थिक व्यवस्था, सुरक्षा तथा लोककल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य कौटिल्य द्वारा प्रतिपादित राज्य संबंधी विचारों का विश्लेषण करना तथा आधुनिक शासन व्यवस्था के साथ उनकी तुलनात्मक प्रासंगिकता को स्पष्ट करना है। अध्ययन में कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित सप्तांग सिद्धांत, शासक के कर्तव्य, प्रशासनिक दक्षता, राजकोषीय प्रबंधन, दंड व्यवस्था तथा प्रजाकल्याण संबंधी अवधारणाओं का विवेचन किया गया है। इसके साथ ही आधुनिक लोकतांत्रिक शासन के प्रमुख तत्वों, जैसे संवैधानिक सर्वोच्चता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, विधि का शासन तथा नागरिक अधिकारों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि कौटिल्य के अनेक प्रशासनिक सिद्धांत वर्तमान शासन व्यवस्था के लिए उपयोगी हैं, यद्यपि प्राचीन राजतंत्र और आधुनिक लोकतंत्र की मूलभूत संरचनाओं में अंतर विद्यमान है। निष्कर्षतः कौटिल्य के विचारों को आधुनिक संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप समझकर सुशासन, प्रशासनिक जवाबदेही और लोककल्याण की अवधारणाओं को सुदृढ़ किया जा सकता है।



