सतत विकास लक्ष्य - ३ के परिप्रेक्ष्य में भारत में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग का तुलनात्मक अध्ययन - मुरादाबाद मंडल के विशेष संदर्भ में
DOI:
https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i3.13Keywords:
मातृत्व स्वास्थ्य, प्रसवपूर्व जाँच, संस्थागत प्रसव, सेवा-निरंतरता, मुरादाबाद मंडल, सतत विकास लक्ष्य - ३।Abstract
मातृत्व स्वास्थ्य की स्थिति समझने के लिए केवल स्वास्थ्य संस्थान में प्रसव होने की गणना पर्याप्त नहीं है। गर्भावस्था के दौरान समय पर जाँच, पोषण संबंधी परामर्श, आवश्यक औषधियों का सेवन, सुरक्षित प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल तक पहुँच को परस्पर संबद्ध सेवाओं के रूप में देखना आवश्यक है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के चौथे तथा पाँचवें चरण और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विवरणिका में प्रकाशित सूचनाओं के आधार पर मुरादाबाद मंडल के अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर तथा सम्भल जिलों में मातृत्व सेवाओं के उपयोग की तुलनात्मक समीक्षा करना है। अध्ययन वर्णनात्मक तथा जिला-स्तरीय है; किसी नए व्यक्तिगत सर्वेक्षण या कारणात्मक प्रभाव का दावा नहीं किया गया है। प्रदेश में चार अथवा अधिक प्रसवपूर्व जाँच २६.४ से बढ़कर ४२.४ प्रतिशत तथा संस्थागत प्रसव ६७.८ से बढ़कर ८३.४ प्रतिशत हुआ। पाँच जिलों में चार जाँच का न्यूनतम स्तर सम्भल में ३२.९ और अधिकतम रामपुर में ५०.४ प्रतिशत मिला, जबकि संस्थागत प्रसव ७४.२ से ८३.७ प्रतिशत के मध्य था। मुरादाबाद में दोनों सूचकों के बीच ४७.१ प्रतिशत-बिंदु का सबसे बड़ा अंतर दर्ज हुआ। परिणाम संकेत करते हैं कि प्रसव तक संस्थागत पहुँच के विस्तार के साथ प्रसवपूर्व नियमित संपर्क, पोषण संबंधी सहायता और सेवाओं की गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक है। स्थानीय प्रबंधन, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों तथा जोखिम-आधारित अनुवर्ती व्यवस्था के संबंध में साक्ष्य-संगत सुझाव दिए गए हैं।



