आतंकवाद और भारत की आंतरिक सुरक्षा: बदलते स्वरूप, चुनौतियाँ एवं नीतिगत प्रतिरक्षा का विश्लेषण
Author : डॉ० कुलदीप सिंह
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.74
सारांश
आतंकवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए केवल एक सैन्य अथवा कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि यह राज्य की संप्रभुता, सामाजिक समरसता, आर्थिक गतिविधियों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिकों के मनोवैज्ञानिक विश्वास को एक साथ प्रभावित करने वाली बहुआयामी चुनौती है। भारत की भौगोलिक स्थिति, विस्तृत स्थल एवं समुद्री सीमाएँ, विविध सामाजिक संरचना, पड़ोसी क्षेत्रों में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क, सीमा-पार प्रायोजन, वामपंथी उग्रवाद, उत्तर-पूर्व की ऐतिहासिक असंतुष्टियाँ तथा डिजिटल माध्यमों से फैलता कट्टरपंथ इस चुनौती को जटिल बनाते हैं। प्रस्तुत शोध-लेख का उद्देश्य भारत में आतंकवाद के बदलते स्वरूप, उसके आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव, राज्य की संस्थागत एवं विधिक प्रतिक्रिया तथा भविष्य की नीति-आवश्यकताओं का विश्लेषण करना है। अध्ययन वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है और इसमें गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण, संसद के आधिकारिक उत्तरों, भारतीय विधि-संहिता तथा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिवेदनों और नीति-दस्तावेजों का उपयोग किया गया है। उपलब्ध आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा के अनेक संकेतकों में उल्लेखनीय कमी आई है; फिर भी ऑनलाइन कट्टरपंथ, ड्रोन-आधारित तस्करी, छोटे विकेन्द्रीकृत मॉड्यूल, आतंकी वित्तपोषण, संगठित अपराध से गठजोड़ और महत्त्वपूर्ण अवसंरचना पर साइबर खतरे नई चिंता के विषय हैं। लेख का निष्कर्ष है कि टिकाऊ आंतरिक सुरक्षा केवल कठोर दमन से नहीं, बल्कि सटीक खुफिया तंत्र, निष्पक्ष न्याय, स्थानीय विकास, सामाजिक विश्वास, डिजिटल साक्षरता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकार-सम्मत शासन के संयुक्त प्रयोग से संभव है।
मुख्य शब्द: आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा, सीमा-पार आतंकवाद, कट्टरपंथ, वामपंथी उग्रवाद, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण, आतंकवाद-रोधी नीति
Cite this Article:
सिंह, डॉ० कुलदीप . (2026). आतंकवाद और भारत की आंतरिक सुरक्षा: बदलते स्वरूप, चुनौतियाँ एवं नीतिगत प्रतिरक्षा का विश्लेषण. The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.737–745, Volume-04, Issue-04, January-2026, https://theresearchdialogue.com/
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