भारत-विभाजन की हिंदी कहानियों में मानवीय त्रासदी और सांस्कृतिक पहचान
Vol. 05, Issue 01, pp. 377–385 | Published: 21 July 2026
Author(s) : धर्मेन्द्र कुमार सेहरा
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.39
सारांश:
भारत-विभाजन (1947) भारतीय इतिहास की सबसे भीषण मानवीय त्रासदियों में से एक था, जिसने लाखों लोगों के जीवन, स्मृतियों और सांस्कृतिक अस्तित्व को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। हिंदी कहानियों में विभाजन केवल राजनीतिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि विस्थापन, हिंसा, भय, असुरक्षा, पारिवारिक विघटन तथा मानवीय संबंधों के टूटने की करुण गाथा के रूप में चित्रित हुआ है। प्रस्तुत शोध-लेख का उद्देश्य हिंदी विभाजन-कथाओं में निहित मानवीय त्रासदी और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्नों का विश्लेषण करना है। भीष्म साहनी, यशपाल, कमलेश्वर, कृष्णा सोबती तथा अन्य कथाकारों की रचनाओं के माध्यम से यह अध्ययन दर्शाता है कि विभाजन ने व्यक्तियों और समुदायों की सांस्कृतिक स्मृतियों, भाषायी पहचान, धार्मिक सह-अस्तित्व और सामाजिक मूल्यों को किस प्रकार प्रभावित किया। साथ ही, ये कहानियाँ मानवीय संवेदना, सहिष्णुता और साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं। इस प्रकार हिंदी विभाजन-कथाएँ इतिहास, स्मृति और पहचान के जटिल अंतर्संबंधों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं।
कुंजी शब्द— भारत-विभाजन, हिंदी कहानी, मानवीय त्रासदी, सांस्कृतिक पहचान, विस्थापन, सांप्रदायिकता, स्मृति, विभाजन साहित्य, मानवीय संवेदना, साझा संस्कृति।
Cite this Article
सेहरा, धर्मेन्द्र कुमार .(2026). भारत-विभाजन की हिंदी कहानियों में मानवीय त्रासदी और सांस्कृतिक पहचान.The Research Dialogue, 5(2), 377–385., Volume-05, Issue-02, July-2026. DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.39
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