The Research Dailogue

वैदिक काल में महिलाओं की भूमिका

Vol. 05, Issue 01, pp. 163–166 |  Published: 07 July 2026

Author: डाॅ0 तेजेन्द्र प्रताप सिंह

DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.18

शोध सारांश:
20 वी सदी के शुरूआती दशकों मे इतिहास की पुस्तकों में महिलाओं को लेकर काफी कुछ छपने लगा था। इसका प्रमुख कारण था, महिला सुधार आंदोलन। राजा राय मोहन राय जैसे समाज सुधारको ने समाज में महिलाओं की स्थिति सुधरने का काफी प्रयास किया। एस॰ अल्तेकर ने 1920 के दशक में हिंदू समाज में महिलाओं की स्थिति पर एक पुस्तक लिखी। इसमें इन्हांेने प्राचीन सहित्यों जैसे वेदों का सहारा लिया और उन्हांेने यह दर्शाने का प्रयास किया कि प्राचीन काल में महिलाओं को काफी अधिकार और स्वंतत्रता प्राप्त थी, तथा उनका काफी सम्मान होता था। परन्तु आधुनिक काल में महिलाओं की स्थिति में काफी बदलाव आया और उनकी स्थिति काफी दयनीय हो गयी। इन्होंने वैदिक काल को महिला के स्वर्ण युग कहा हंै। क्योकि वैदिक काल में महिलाएं धार्मिक क्रियाकलापांे में भाग लेती थी , सभा में भाग लेती थी और उन्हें देवी समझा जाता था। इन सब तर्को के आधार पर महिलाओं को सशक्त करने का प्रयास किया गया। इस शोध पत्र के द्वारा हम वैदिक काल मे महिलाआंे की स्थिति का अध्ययन करेंगें।
कुंजी शब्द: वैदिक काल,महिला,वैदिक ग्रन्थ,स्वतंत्रता,अधिकार।

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सिंह..डा0 तेजेन्द्र प्रताप (2026). वैदिक काल में महिलाआं की भूमिका” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, 5(2), 163–166., Volume-05, Issue-02, July-2026, DOI : https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.18

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