The Research Dailogue

अद्वैत वेदान्त में नैतिक विमर्शरू एक अध्ययन

Vol. 05, Issue 01, pp. 126–141|  Published: 07 July 2026

Author: डा0 श्रीप्रकाश तिवारी

DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.13

सार
अद्वैत वेदान्त भारतीय दार्शनिक परम्परा की एक अत्यन्त प्रभावशाली एवं विकसित विचारधारा है, जिसका व्यवस्थित प्रतिपादन आदि शंकराचार्य ने किया। सामान्यतः यह धारणा व्यक्त की जाती है कि अद्वैत वेदान्त का मुख्य उद्देश्य ब्रह्म-आत्मा की अभिन्नता का प्रतिपादन तथा मोक्ष की प्राप्ति है, इसलिए इसमें नैतिकता का स्वतंत्र स्थान नहीं है। किन्तु यह धारणा एकांगी है। वास्तव में अद्वैत वेदान्त में नैतिकता को आत्मशुद्धि, चित्तशुद्धि तथा ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के लिए अनिवार्य साधन माना गया है। सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, अपरिग्रह, आत्मसंयम तथा निष्काम कर्म जैसे नैतिक मूल्य ज्ञान की प्राप्ति के लिए आवश्यक आध्यात्मिक अनुशासन का निर्माण करते हैं। अद्वैत वेदान्त के अनुसार जब तक मनुष्य राग, द्वेष, अहंकार, लोभ तथा अविद्या से मुक्त नहीं होता, तब तक वह आत्मज्ञान का अधिकारी नहीं बन सकता। इस दृष्टि से नैतिकता केवल सामाजिक व्यवस्था का साधन न होकर आत्मानुभूति की पूर्वपीठिका है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में अद्वैत वेदान्त की नैतिक अवधारणा का दार्शनिक विश्लेषण किया गया है। इसमें उपनिषदों, भगवद्गीता, ब्रह्मसूत्र तथा शंकरभाष्य के आलोक में नैतिक मूल्यों का विवेचन करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि अद्वैत वेदान्त का नैतिक चिंतन व्यक्ति, समाज तथा विश्वमानवता के लिए आज भी प्रासंगिक है। साथ ही समकालीन नैतिक संकटोंकृजैसे उपभोक्तावाद, पर्यावरणीय असंतुलन, सामाजिक असमानता तथा मानवीय संवेदनहीनताकृके संदर्भ में अद्वैत वेदान्त की उपयोगिता का आलोचनात्मक परीक्षण भी किया गया है।
प्रमुख शब्दरू अद्वैत वेदान्त, नैतिकता, ब्रह्म, आत्मा, शंकराचार्य, मोक्ष, चित्तशुद्धि, निष्काम कर्म।Cite this Article

डा0 श्रीप्रकाश तिवारी,अद्वैत वेदान्त में नैतिक विमर्शर: एक अध्ययनThe Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.126–141, Volume-05, Issue-02, July-2026, https://theresearchdialogue.com/

License

Copyright (c) 2025 shiksha samvad
Creative Commons License This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.