रोहिंग्या शरणार्थी संकट और भारत-बांग्लादेश संबंधों की बदलती प्रकृति का अध्ययन
Author: राज बाला
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.07
सारांश
रोहिंग्या शरणार्थी संकट दक्षिण एशिया के समकालीन भू-राजनीतिक, मानवीय तथा सुरक्षा विमर्शों में एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में उभरा है। म्यांमार के रखाइन प्रांत से बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन ने विशेष रूप से बांग्लादेश को प्रभावित किया है, जहाँ लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों को आश्रय प्रदान किया गया है। इस संकट ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय चुनौतियों को जन्म दिया है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की प्रकृति को भी प्रभावित किया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य रोहिंग्या शरणार्थी संकट के संदर्भ में भारत और बांग्लादेश के मध्य विकसित हो रहे कूटनीतिक, सामरिक, आर्थिक तथा सुरक्षा संबंधों का विश्लेषण करना है। यह शोध द्वितीयक स्रोतों, सरकारी दस्तावेजों, नीति-पत्रों तथा अकादमिक साहित्य के आधार पर संकट के क्षेत्रीय प्रभावों और दोनों देशों की नीतिगत प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन करेगा। अध्ययन यह स्पष्ट करने का प्रयास करेगा कि रोहिंग्या संकट ने दक्षिण एशिया में सहयोग, सुरक्षा प्रबंधन और क्षेत्रीय कूटनीति के नए आयाम किस प्रकार निर्मित किए हैं।
मुख्य शब्द— रोहिंग्या शरणार्थी संकट, भारत-बांग्लादेश संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा, कूटनीति, विस्थापन, मानवीय संकट, दक्षिण एशिया, सीमा प्रबंधन, भू-राजनीति, शरणार्थी नीति।
Cite this Article
राज बाला,“ रोहिंग्या शरणार्थी संकट और भारत-बांग्लादेश संबंधों की बदलती प्रकृति का अध्ययन” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.58–66, Volume-05, Issue-02, July-2026, https://theresearchdialogue.com/
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