वेदों में वन संरक्षण एवं वर्तमान में उसकी उपयोगिता
Vol. 05, Issue 01, pp. 53–57| Published: 07 July 2026
Author: श्रीमती सन्ध्या गिरि
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.06
सारांश
हिन्दू समाज में जो यह मान्यता प्रचलित है कि यह शरीर पंचतत्त्वात्मक है तो यहाँ यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि केवल मानव शरीर ही नहीं वरन् सम्पूर्ण पर्यावरण पंचमहाभूतों अग्नि, जल, आकाश, वायु और तेजस् से ही विनिर्मित हैं इसीलिए वैदिक मानव और उनके अग्रचेता ऋषियों ने सृष्टि के कारण भूत तत्त्वों को दैव श्रेणी में रखकर उनका स्तवन और आराधन किया था। उसका निहितार्थ यही था कि जब पर्यावरण का निर्माण करने वाले घटक भूमि, जल, अग्नि, वायु आदि प्रसन्न और स्वच्छ रहेंगे तो मानव के परितः स्थित पर्यावरण भी स्वस्थ एवं जीवनानुकूल रहेगा। रोग, दोष, संताप मानव शरीर और समाज से दूर रहेंगे।
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श्रीमती सन्ध्या गिरि,“ वेदों में वन संरक्षण एवं वर्तमान में उसकी उपयोगिता” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.53–57, Volume-05, Issue-02, July-2026, https://theresearchdialogue.com/
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