ममता कालिया के कथा साहित्य में पारिवारिक संबंधों का विघटन और पुनर्संरचना: एक अध्ययन
Author: प्रीतिका
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.09
सारांश
ममता कालिया हिंदी कथा साहित्य की प्रमुख लेखिका हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय जीवन, स्त्री-अस्मिता, पारिवारिक संबंधों तथा सामाजिक परिवर्तन को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ममता कालिया के कथा साहित्य में पारिवारिक संबंधों के विघटन और पुनर्संरचना की प्रक्रिया का विश्लेषण करना है। उनकी कहानियों और उपन्यासों में आधुनिकता, शहरीकरण, आर्थिक स्वतंत्रता, बदलती लैंगिक भूमिकाओं तथा व्यक्तिवादी जीवन-दृष्टि के कारण पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों में आए परिवर्तन को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि पारिवारिक संबंधों में उत्पन्न तनाव, संवादहीनता, पीढ़ीगत संघर्ष तथा दांपत्य असंतुलन विघटन के प्रमुख कारण हैं। साथ ही, लेखिका संबंधों के पूर्ण विघटन के स्थान पर नए मूल्यों, आपसी समझ, सह-अस्तित्व और समानता पर आधारित संबंधों की पुनर्संरचना की संभावनाओं को भी रेखांकित करती हैं। इस प्रकार ममता कालिया का कथा साहित्य समकालीन भारतीय परिवार की बदलती संरचना और सामाजिक यथार्थ का महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करता है।
मुख्य शब्द— ममता कालिया, कथा साहित्य, पारिवारिक संबंध, विघटन, पुनर्संरचना, मध्यवर्गीय जीवन, स्त्री-अस्मिता, सामाजिक परिवर्तन, दांपत्य संबंध, समकालीन हिंदी साहित्य।
Cite this Article
प्रीतिका,“ ममता कालिया के कथा साहित्य में पारिवारिक संबंधों का विघटन और पुनर्संरचना: एक अध्ययन” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.79–88, Volume-05, Issue-02, July-2026, https://theresearchdialogue.com/
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