जलवायु परिवर्तन, जल सुरक्षा एवं सतत विकास: एक भौगोलिक विश्लेषण
Author : अनिल कुमार सिंह
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.79
सारांश (Abstract )
जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है, जिसका प्रभाव प्राकृतिक संसाधनों, मानव जीवन, जैव विविधता तथा आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक रूप से दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से जल संसाधनों पर इसके प्रभाव ने जल सुरक्षा को एक महत्वपूर्ण वैश्विक एवं राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है। तापमान में वृद्धि, वर्षा के स्वरूप में परिवर्तन, हिमनदों का तीव्र पिघलना, सूखा एवं बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति ने जल उपलब्धता और उसके समुचित प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। भारत जैसे कृषि प्रधान एवं विशाल जनसंख्या वाले देश में जलवायु परिवर्तन के कारण जल संकट और अधिक गंभीर होता जा रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा सतत विकास पर पड़ रहा है। साथ ही भारत में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, समेकित जल संसाधन प्रबंधन तथा सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों का भी विवेचन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वैज्ञानिक योजना, भू-स्थानिक तकनीकों (GIS एवं Remote Sensing) का प्रभावी उपयोग, सामुदायिक सहभागिता तथा सतत जल प्रबंधन की रणनीतियाँ जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कुंजी शब्द (Keywords) – जलवायु परिवर्तन, जल सुरक्षा, सतत विकास, जल संसाधन प्रबंधन, भूगोल, जल संरक्षण, सतत विकास लक्ष्य (SDGs)
Cite this Article:
सिंह, अनिल कुमार (2026). जलवायु परिवर्तन, जल सुरक्षा एवं सतत विकास: एक भौगोलिक विश्लेषण. The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.775–780, Volume-04, Issue-04, January-2026, https://theresearchdialogue.com/
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Copyright (c) 2025 shiksha samvad
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