नगरीकरण का कृषि भूमि पर प्रभाव: प्रयागराज, उत्तर प्रदेश का एक शोधात्मक अध्ययन
Vol. 05, Issue 01, Pp. 647–655 | Published: 21 July 2026
Author(s): अवनीश कुमार1, डॉ० हरिओम गुप्ता2
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.67
सारांश:
भारत में तीव्र नगरीकरण के कारण कृषि भूमि का ह्रास एक गंभीर समस्या बन गई है। प्रयागराज जनपद भी इसी संकट का शिकार है। यह अध्ययन प्रयागराज में 2015 से 2025 तक नगरीकरण के कारण कृषि भूमि में होने वाले परिवर्तनों का विश्लेषण करता है। मिश्रित अनुसंधान पद्धति अपनाते हुए 550 किसान परिवारों का सर्वेक्षण किया गया। परिणामों से पता चलता है कि दस वर्षों में प्रयागराज में शहरी क्षेत्र में 37.2% की वृद्धि हुई है, जबकि कृषि भूमि में 29.8% की कमी आई है। औद्योगिक विकास और आवासीय निर्माण के कारण 17,420 हेक्टेयर कृषि भूमि खो गई है। सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। गेहूं और चने का उत्पादन क्रमशः 32% और 38% तक घट गया है। आजीविका में विविधता आई है लेकिन नई आजीविकाएं अस्थिर और कम आय वाली हैं। निष्कर्ष यह सुझाता है कि कृषि भूमि संरक्षण के लिए तत्काल नीति-निर्माण और सतत विकास रणनीति आवश्यक है।
मुख्य शब्द: नगरीकरण, कृषि भूमि, भूमि उपयोग, सीमांत किसान, स्थायी विकास, जोत विखंडन
Cite this Article
कुमार, अवनीश, गुप्ता, डॉ० हरिओम. (2026). नगरीकरण का कृषि भूमि पर प्रभाव: प्रयागराज, उत्तर प्रदेश का एक शोधात्मक अध्ययन. The Research Dialogue, 5(2), 647–655, Volume-05, Issue-02, July-2026. DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.67
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