विकसित भारत में युवा वर्ग की सहभागिता: संभावनाएँ, चुनौतियाँ और भावी दिशा
Vol. 05, Issue 01, Pp. 423–423 | Published: 21 July 2026
Author: डॉ. मनोज कुमार गौतम
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.45
सारांश
वर्ष 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूर्ण करेगा। इस अवसर तक देश को आर्थिक रूप से समृद्ध, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण, ज्ञान और तकनीक में अग्रणी, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों से सुदृढ़ राष्ट्र बनाने की परिकल्पना “विकसित भारत@2047” के रूप में सामने रखी गई है। यह लक्ष्य केवल सरकार, उद्योग अथवा प्रशासन के प्रयासों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसकी सफलता उस युवा पीढ़ी पर निर्भर करेगी जो आज विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों, खेतों, कारखानों, प्रयोगशालाओं, स्टार्टअपों और सामुदायिक संगठनों में सक्रिय है। भारत में 15–29 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या वर्ष 2021 में कुल आबादी का 27.2 प्रतिशत थी। वर्ष 2036 तक इसका अनुपात 22.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, परंतु संख्या तब भी लगभग 34.5 करोड़ होगी। इसलिए भारत के पास एक बड़ा जनसांख्यिकीय अवसर है, किंतु यह अवसर तभी विकास में बदल सकता है जब युवा शिक्षित, स्वस्थ, कुशल, रोजगारयोग्य, नवाचारी और सामाजिक रूप से उत्तरदायी हों।
प्रस्तुत लेख द्वितीयक आँकड़ों और सरकारी दस्तावेजों पर आधारित वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी, कृषि, लोकतंत्र, सामाजिक समावेशन और पर्यावरण के क्षेत्रों में युवाओं की भूमिका का विवेचन किया गया है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि युवाओं को योजनाओं का निष्क्रिय लाभार्थी न मानकर नीति-निर्माण और स्थानीय विकास का सक्रिय साझेदार बनाया जाना चाहिए।
मुख्य शब्द: विकसित भारत, युवा सहभागिता, जनसांख्यिकीय लाभांश, कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता, लोकतंत्र, सामाजिक उत्तरदायित्व।
Cite this Article
गौतम, डॉ. मनोज कुमार. (2026). विकसित भारत में युवा वर्ग की सहभागिता: संभावनाएँ, चुनौतियाँ और भावी दिशा. The Research Dialogue, 5(2), 423–430, Volume-05, Issue-02, July-2026. DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.45
License
Copyright (c) 2025 shiksha samvad
This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.