आधुनिक युग में नारी शक्ति का परिवर्तनशील स्वरूप: एक समीक्षात्मक अध्ययन
Author: श्वेता
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.68
सारांश
भारतीय आधुनिक युग में नारी की भूमिका एक सतत परिवर्तनशील और प्रेरणादायी यात्रा रही है, जिसमें आत्मनिर्भरता, संघर्षशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के स्वर एक साथ गूँजते हैं। नारी शक्ति केवल एक सामाजिक विचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह समाज की प्रगति का एक अनिवार्य और सजीव आयाम बन चुकी है। वर्तमान समय में महिलाएँ शिक्षा, राजनीति, विज्ञान और अनेक व्यावसायिक क्षेत्रों में सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। भारतीय इतिहास की इस समृद्ध यात्रा में अहिल्याबाई होल्कर से लेकर सावित्रीबाई फुले तक, अनेक महिलाओं ने अपने जीवन-संघर्ष, साहस और दूरदृष्टि से समाज को नई दिशा दी है। आज की कार्यरत महिलाएँ सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपने कौशल और आत्मविश्वास से एक नई पहचान निर्मित कर रही हैं। प्रस्तुत शोधपत्र इसी ऐतिहासिक और समकालीन यात्रा का समीक्षात्मक विश्लेषण करता है और यह प्रतिपादित करता है कि आधुनिक नारी शक्ति का स्वरूप न केवल व्यक्तिगत, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी वाहक है।
कूट शब्द: नारी शक्ति, आधुनिक भारत, सामाजिक परिवर्तन, महिला सशक्तीकरण, दार्शनिक विश्लेषण
Cite this Article
श्वेता, “आधुनिक युग में नारी शक्ति का परिवर्तनशील स्वरूप: एक समीक्षात्मक अध्ययन” The Research Dialogue, Open Access Peer reviewed & Refereed Journal, Pp-667–675, Volume-05, Issue-01, April-2026, https://theresearchdialogue.com/
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