नागार्जुन और अज्ञेय की कविताओं में स्वतंत्रता, प्रतिबद्धता और सृजनात्मकता
Author: सचिन कुमार
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.08
सार
हिन्दी कविता के आधुनिक परिदृश्य में नागार्जुन और अज्ञेय दो ऐसे महत्वपूर्ण कवि हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता, प्रतिबद्धता और सृजनात्मकता की अवधारणाओं को भिन्न-भिन्न वैचारिक एवं कलात्मक धरातलों पर अभिव्यक्त किया। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य इन दोनों कवियों की काव्य-दृष्टि का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करना है कि स्वतंत्रता की अवधारणा उनके काव्य में किस प्रकार रूपायित होती है तथा सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता किस रूप में व्यक्त होती है। नागार्जुन की कविता जनजीवन, सामाजिक यथार्थ और प्रतिरोध की चेतना से अनुप्राणित है, जबकि अज्ञेय की कविता वैयक्तिक स्वतंत्रता, आत्मान्वेषण और कलात्मक प्रयोगधर्मिता को प्रमुखता देती है। अध्ययन में यह भी विश्लेषित किया गया है कि दोनों कवियों की सृजनात्मकता अपने-अपने वैचारिक आधारों के बावजूद हिन्दी कविता को नवीन संवेदना, अभिव्यक्ति और दृष्टि प्रदान करती है। यह शोध आधुनिक हिन्दी काव्य में विचार और कला के अंतर्संबंधों को समझने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
मुख्य शब्द– नागार्जुन, अज्ञेय, स्वतंत्रता, प्रतिबद्धता, सृजनात्मकता, आधुनिक हिन्दी कविता, जनवादी चेतना, प्रयोगवाद, आत्मान्वेषण, काव्य-दृष्टि।
Cite this Article
सचिन कुमार ,“ नागार्जुन और अज्ञेय की कविताओं में स्वतंत्रता, प्रतिबद्धता और सृजनात्मकता” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.67–78, Volume-05, Issue-02, July-2026, https://theresearchdialogue.com/
License
Copyright (c) 2025 shiksha samvad
This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.