भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में डॉक्टर बी.आर. आंबेडकर के शैक्षिक विचारों की उपादेयता
Vol. 05, Issue 01, Pp. 452–457 | Published: 21 July 2026
Author: जयराम
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.48
सारांश
भारतीय ज्ञान परंपरा वेदों, उपनिषदों,रामायण, महाभारत, बौद्ध एवं जैन दर्शन और संत परंपरा की शिक्षाओं का संग्रह है। जिसमें मानव के लिए आदर्श एवं मूल्यों का पालन करते हुए नैतिकता एवं आध्यात्मिक विकास पर जोर दिया गया है। डॉ बी.आर. आंबेडकर के विचारों एवं दर्शन में मानवाधिकारों की एक सशक्त झलक दिखाई देती है। डॉ बी आर आंबेडकर शिक्षा को केवल एक सूचना एवं नौकरी का साधन नहीं मानते थे बल्कि वे शिक्षा को शारीरिक विकास, मानसिक विकास,नैतिक विकास, और सामाजिक न्याय प्राप्त करने का एक हथियार मानते थे। वे शोषित, दलित, पिछड़े एवं महिलाओं के लिए सस्ती, अनिवार्य एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करते थे। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वे छात्रवृत्ति, छात्रावास और आरक्षण जैसे उपायों पर भी जोर देते थे। डॉ आंबेडकर ने तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था करने की बात कही है। जिस तरह से भारतीय ज्ञान परंपरा में मानवीय पक्ष पर जोर दिया गया है उसी तरह डॉक्टर आंबेडकर ने शिक्षा को जीवन निर्माण और लोक कल्याण से जोड़ते हुए सभी के लिए समान अनिवार्य शिक्षा व्यवस्था की बात रखी है। डॉ आंबेडकर ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहते थे कि लोग जाति आधारित भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार से लड़ सकें और उसे हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। वे चाहते थे कि हमारी शिक्षा व्यवस्था लोगों को निडर, जागरूक,संगठित और अपने हक एवं अधिकारों से लड़ने के लिए तैयार करे। वे धर्मनिरपेक्ष शिक्षा, तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के पक्षधर थे जिससे लोगों को समावेशी और आधुनिक शिक्षा के लिए तैयार किया जा सके। डॉ आंबेडकर ने महिलाओं के विकास पर भी स्मरणीय कार्य किया उन्होंने कहा कि यदि किसी समाज की प्रगति देखनी हो तो यह देखें कि उस समाज की महिलाओं ने कितनी प्रगति की है। वे समाज के विकास का पैमाना महिलाओं के विकास को मानते थे ,उनका मानना था कि यदि एक पुरुष शिक्षित होता है तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है और एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है उन्होंने महिलाओं के लिए हिंदू कोड बिल को संसद में पास करने का प्रयास किया जिसे बाद में महिलाओं को उत्तराधिकार,समान कार्य के लिए समान वेतन और कई विवाह अधिनियम महिलाओं की रक्षा और न्याय के लिए सामने आए हैं। अगर संक्षेप में कहा जाए तो डॉक्टर आंबेडकर ने भारतीय ज्ञान परंपरा के नैतिक एवं आध्यात्मिक पक्ष तक पहुंचने के लिए जो आधारभूत लोगों की आवश्यकताएं थी उन पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय समाज में दलित पिछड़े एवं स्त्री समुदाय को अन्याय से बाहर निकालने के लिए एवं सम्मान की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया है जिससे वे स्वयं, समाज एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे पाएं और नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास कर सकें। डॉ बी आर आंबेडकर समाज में समता, समानता,स्वतंत्रता, न्याय एवं बंधुत्व को स्थापित करना चाहते थे जो लोकतंत्र के आधार स्तंभ है मानवीय मूल्यों की बुनियाद हैं ऐसे में डॉ आंबेडकर के शैक्षिक विचार आज भी नितांत प्रासंगिक हैं।
की वर्ड्स – भारतीय ज्ञान परंपरा, शैक्षिक विचार।
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जयराम. (2026). भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में डॉक्टर बी.आर.आंबेडकर के शैक्षिक विचारों की उपादेयता. The Research Dialogue, 5(2), 452–457, Volume-05, Issue-02, July-2026. DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.48
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