नगरीकरण की समस्याओं का जीवन गुणता पर प्रभाव एवं उसके संभावित समाधानों का भौगोलिक अध्ययन: बिजनौर नगर के विशेष संदर्भ में
Author(s) : ऋतु सैनी1, प्रो. महिपाल सिंह2
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i2.29
शोध सार –
उन्नीसवीं सदी में औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप नगरीकरण ने रफ्तार पकड़ी। वास्तव में नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत ऐसे अधिवासों का विकास सम्मिलित है जिनकी प्रकृति मूलतः ग्रामीण है किंतु समय के साथ हुए क्रमिक विकास द्वारा नगरों में परिवर्तित हो गए हैं। नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या प्रवास व उससे संबंधित व्यावसायिक संरचना में बदलाव होता है। भारत जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ नगरीय जनसंख्या में भी बहुत तेज़ी के साथ वृद्धि कर रहा है। नगरीकरण का विकास उत्तरोत्तर उस नगर में अनेक समस्याओं को जन्म देता है। बिजनौर शहर जिला बिजनौर का मुख्यालय है। यह एक मध्यम श्रेणी का शहर है। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य बिजनौर शहर की मुख्य समस्यायों का विश्लेषण करना एवं उन समस्याओं के संभावित समाधानों की तलाश कर भविष्य की योजनाओं का निर्माण करना है। अध्ययन के लिए प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों श्रेणी के आँकड़ों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक आंकड़ों के लिए गूगल फॉर्म आधारित प्रश्नावली के माध्यम से बिजनौर नगर के 100 लोगों का डेटा एकत्रित किया गया। शोध अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि जितनी तीव्रता से बिजनौर नगर में जनसंख्या की वृद्धि हुई है उतनी तीव्रता से नगर की आधारभूत सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है। शोध अध्ययन शहरी नियोजन के लिए वैज्ञानिक तकनीक, ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उचित निस्तारण, वर्षा जल का संरक्षण, हरित क्षेत्रों का विकास एवं जन सहभागिता से नगर की समस्याओं का विवेकपूर्ण समाधान किए जा सकने का पक्ष भी सामने लाता है। इससे एक ओर तो भविष्य में होने वाली नगरीकरण की समस्याओं का समाधान होगा वहीं दूसरी ओर यह बिजनौर शहर में रहने वाले लोगों की जीवन गुणता अर्थात गुणवत्ता में भी सुधार करने में सक्षम होगा।
मूल शब्द – नगरीकरण, प्रवास, व्यावसायिक संरचना, जीवन गुणता, सतत विकास।
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सैनी, ऋतु. सिंह, प्रो. महिपाल. (2026). नगरीकरण की समस्याओं का जीवन गुणता पर प्रभाव एवं उसके संभावित समाधानों का भौगोलिक अध्ययन: बिजनौर नगर के विशेष संदर्भ में. The Research Dialogue, 5(2), 279–290., Volume-05, Issue-02, July-2026.
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