नकद से डिजिटल तक: भारत की UPI क्रांति और घरेलू बचत तथा अनौपचारिक व्यवसायों पर इसका प्रभाव
Author: डॉ सुधीर कुमार सिंह
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v4i4.26
सारांश
UPI के माध्यम से नकद से डिजिटल भुगतान में बदलाव ने आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। यह प्रणाली तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक लेनदेन का माध्यम बन चुकी है, जो वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित कर रही है। इससे साधनों के बचत पैटर्न में बदलाव आया है, जहां पारंपरिक तरीके डिजिटल रिकॉर्ड-केवल बचत की ओर बढ़ रहे हैं। व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय अधिक पारदर्शी हुए हैं, जिससे वित्तीय प्रबंधन में सुधार हो रहा है। अनौपचारिक व्यवसायों का डिजिटलीकरण हुआ है, जिससे वे बेहतर वित्तीय रिकॉर्ड रख पा रहे हैं और नई ऋण और निवेश के अवसर प्राप्त कर रहे हैं। यह संक्रमण छोटे व्यवसायों की उत्पादकता और स्थिरता को मजबूत कर रहा है। सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षा ढाँचों का विकास किया है, जिसमें डेटा सुरक्षा और लेनदेन पारदर्शिता पर ध्यान दिया गया है। इस परिवर्तन से भारत की वित्तीय व्यवस्था में स्थायी एवं समावेशी क्रांति आई है, जो घरेलू बचत और छोटे व्यवसायों के विकास के नए द्वार खोल रही है।
मुख्य शब्द: UPI, डिजिटल भुगतान, डिजिटल रिकॉर्ड, आर्थिक संरचना ।
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डॉ सुधीर कुमार सिंह,“ नकद से डिजिटल तक: भारत की UPI क्रांति और घरेलू बचत तथा अनौपचारिक व्यवसायों पर इसका प्रभाव”The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.249–257,Volume-04, Issue-04, January-2026, https://theresearchdialogue.com/
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