बालश्रम और सामाजिक वंचना: विद्यालय न जाने वाले बालक के जीवन अनुभवों का साक्षात्कारात्मक अध्ययन
Vol. 05, Issue 01, pp. 120–126 | Published: 15 April 2026
Author :डॉ0 पूनम देवी
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.14
शोधसार
वर्तमान समाज में बालश्रम एक गम्भीर सामाजिक समस्या के रूप में विद्यमान है अनेक बच्चे आर्थिक, सामाजिक एवं पारिवारिक कारणों से विद्यालय नहीं जा पाते और श्रम में संलग्न हो जाते है जिस कारण से बच्चें के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थय एवं समग्र विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बाल्यावस्था जीवन का वह महत्वपूर्ण चरण है जिसमें शिक्षा खेल एवं नैतिक विकास के माध्यम से व्यक्तित्व का निर्माण होता है किन्तु जब बच्चे आर्थिक गतिविधियों में संलग्न हो जाते है तो उनका सर्वांगीण विकास बाधित हो जाता है । प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य विद्यालय न जाने वाले कार्यरत बालकों का साक्षात्कार के माध्यम से उनकी सामाजिक वंचनाओं को समझना है। अध्ययन गुणात्मक पद्धति पर आधारित है तथा इसमें साक्षात्कार विधि का प्रयोग किया गया है। निष्कर्षो से स्पष्ट है कि गरीबी, पारिवारिक संकट, अशिक्षा एवं सामाजिक असमानता बालक के विद्यालय न जाने के प्रमुख कारण है। यह शोध पत्र कार्यरत बालकों का साक्षात्कार के माध्यम से सामाजिक वंचनाओं की वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास करता है।
संकेत शब्दः- सामाजिक वंचना, साक्षात्कार, गुणात्मक, बालश्रमिक, अमानवीय, उन्मूलन, नैसर्गिक, शोषण
Cite this Article:
देवी. डॉ. पूनम, “बालश्रम और सामाजिक वंचना: विद्यालय न जाने वाले बालक के जीवन अनुभवों का साक्षात्कारात्मक अध्ययन” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp-120–126,Volume-05, Issue-01, April-2026, https://theresearchdialogue.com/
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