बरेली जनपद के स्नातक स्तर पर अध्ययनरत् विद्यार्थिंयों के जीवन कौशल का तुलनात्मक अध्ययन
Author(s) :डॉ अमित कुमार सिंह और यसबंत कुमारी
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.11
सारांश
इस शोध पत्र “बरेली जनपद के स्नातक स्तर पर अध्ययनरत विद्यार्थियों के जीवन कौशल का तुलनात्मक अध्ययन” में भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक, , व्यवहारिक एवं व्यावसायिक विकास से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे को वैज्ञानिक रूप से परखा गया है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तकनीकी रूप से उन्नत परिवेश में जीवन कौशल विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास का आधार बन चुके हैं इसलिए स्नातक स्तर पर अध्ययनरत युवा वर्ग के इन कौशलों का विश्लेषणात्मक अध्ययन अत्यधिक प्रासंगिक है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह परीक्षण करना था कि क्या लिंग (छात्र/छात्रा) तथा निवास क्षेत्र (ग्रामीण/शहरी) के आधार पर विद्यार्थियों के जीवन कौशल में कोई सार्थक अंतर विद्यमान है या नहीं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दो प्रमुख परिकल्पनाएँ निर्मित की गईं – पहली परिकल्पना यह कि स्नातक स्तर के छात्र एवं छात्राओं के जीवन कौशल में कोई सार्थक अंतर नहीं है और दूसरी परिकल्पना यह कि ग्रामीण तथा शहरी विद्यार्थियों के जीवन कौशल में कोई सार्थक अंतर नहीं है। शोध की जनसंख्या बरेली जनपद के विभिन्न महाविद्यालयों में अध्ययनरत स्नातक स्तर के विद्यार्थी थे जिनमें से 250 विद्यार्थियों को स्तरीकृत यादृच्छिक नमूना चयन विधि से चुना गया, जिससे नमूने की प्रतिनिधिकता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। शोध उपकरण के रूप में डॉ. अंजूम अहमद एवं श्रीमती सब्बा परवीन द्वारा निर्मित जीवन कौशल प्रश्नावली का प्रयोग किया गया, जिसमें निर्णय क्षमता, समस्या समाधान, संप्रेषण कौशल, आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता, सृजनात्मकता एवं आलोचनात्मक चिंतन जैसे जीवन कौशल के प्रमुख आयाम शामिल थे। सांख्यिकीय विश्लेषण हेतु माध्य, मानक विचलन तथा टी-परीक्षण का उपयोग किया गया, जिससे समूहों के बीच अंतर की प्रकृति को वैज्ञानिक रूप से जांचा जा सके। विश्लेषण से प्राप्त परिणामों के अनुसार यह स्पष्ट हुआ कि छात्र और छात्राओं के जीवन कौशल में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया, अर्थात लिंग के आधार पर जीवन कौशल के विकास में कोई उल्लेखनीय भिन्नता परिलक्षित नहीं होती। यह निष्कर्ष दर्शाता है कि उच्च शिक्षा के स्तर पर जीवन कौशल का विकास विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमता, अनुभवों और शैक्षणिक वातावरण पर अधिक निर्भर है न कि उनके लिंग पर। वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों के जीवन कौशल में सार्थक अंतर पाया गया, जिसमें शहरी विद्यार्थियों का जीवन कौशल स्तर ग्रामीण विद्यार्थियों की अपेक्षा अधिक उन्नत पाया गया। यह अंतर संकेत करता है कि शहरी परिवेश में मिलने वाले बेहतर शैक्षणिक संसाधन, तकनीकी सुविधाएँ, व्यक्तित्व निर्माण के अवसर, सामाजिक सहभागिता और विविधतापूर्ण अनुभव जीवन कौशल के विकास को प्रोत्साहित करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित संसाधन, कम मगचवेनतम और अवसरों की कमी के कारण विद्यार्थियों के जीवन कौशल अपेक्षाकृत कम विकसित हो पाते हैं। समग्र रूप से यह शोध उच्च शिक्षा में जीवन कौशल के संवर्धन की आवश्यकता पर बल देता है और संकेत करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और संसाधनों के विस्तार की आवश्यकता है ताकि जीवन कौशल विकास में क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सके। यह अध्ययन शिक्षा नीति निर्माताओं, महाविद्यालयों, शिक्षकों एवं सामाजिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जिससे भविष्य में स्नातक विद्यार्थियों के जीवन कौशल को अधिक प्रभावी रूप से विकसित कर रोजगार-योग्यता, सामाजिक दक्षता एवं व्यक्तिगत सशक्तिकरण को बढ़ाया जा सके।
मुख्यशब्द – स्नातक स्तर, विद्यार्थी, जीवन कौशल
Cite this Article:
सिंह डॉ अमित कुमार और कुमारी यसबंत,“बरेली जनपद के स्नातक स्तर पर अध्ययनरत् विद्यार्थिंयों के जीवन कौशल का तुलनात्मक अध्ययन” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp-93–100,Volume-05, Issue-01, April-2026, https://theresearchdialogue.com/
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