The Research Dailogue

अनुसूचित जाति की महिलाओं के शैक्षिक अवसरो को प्रभावित करने वाले समाजिक कारक

Vol. 05, Issue 01, pp. 329–336 |  Published: 15 April 2026

Author(s): रजनी सिंह, प्रो0 संदीप कुमार श्रीवास्तव

DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.39

प्रस्तावन –
भारतीय सभ्यता संस्कृति और परम्परा में नारियों को सदैव ही सम्मानजनक स्थान दिया जाता था। उन्हें सहचरी कहकर पुकारा जाता था। नारियों के लिय यह भी वर्जित है कि-
‘‘यंत्रनार्यस्तु पूज्यते रमन्ते तंत्र देवता’’
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भारतीय संविधान में भी वर्ग भेद और लिंग भेद को समाप्त कर सभी को समान शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। परन्तु इसके बावजूद भी रूढिवादी कारणों से समाज मे जातिगत भेदभाव जकडा हुआ है। भारत की कठोर जाति व्यवस्था के अन्तर्गत ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहने वाले अनुसूचित जाति(ेब) समुदाय की महिलाओं को आज भी गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड रहा है। संवैधानिक सुरक्षा उपायो के बावजूद भेदभाव गरीबी और ंिशक्षा एवं न्याय तक सीमित पहुँच जैसी समस्याए बनी हुई है। अनुसूचित जाति की महिलाओं मे शिक्षा सम्बधी असमानताएँ बनी हुई है। जिनमे कम नमांकन दर उच्च ड्राप-आउट दर और गुणवतापूर्ण शिक्षा तक पहुँच सीमित है।

Cite this Article: 

रजनी सिंह  प्रो0 संदीप कुमार श्रीवास्तव, अनुसूचित जाति की महिलाओं के शैक्षिक अवसरो को प्रभावित करने वाले समाजिक कारक The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp-330–336, Volume-05, Issue-01, April-2026, https://theresearchdialogue.com/

License

Copyright (c) 2025 shiksha samvad
Creative Commons License This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.