The Research Dailogue

व्यावसायिक एवं गैर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थिंयों की संवेगात्मक बुद्धि का तुलनात्मक अध्ययन

Vol. 05, Issue 01, pp. 211–218 |  Published: 15 April 2026

Author(s) :मोना, डॉ. योगेश्वर प्रसाद शर्मा

DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.24

सारांश
यह शोध “व्यावसायिक एवं गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि का तुलनात्मक अध्ययन” आधुनिक शिक्षा प्रणाली की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करता है। वर्तमान वैश्विक एवं प्रतिस्पर्धात्मक युग में यह स्पष्ट हो चुका है कि केवल बौद्धिक क्षमता ही सफलता का निर्धारक नहीं है, बल्कि संवेगात्मक बुद्धि भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संवेगात्मक बुद्धि व्यक्ति की वह क्षमता है जिसके माध्यम से वह अपने तथा दूसरों के भावों को समझता, नियंत्रित करता और सामाजिक परिस्थितियों में संतुलित व्यवहार करता है। प्रस्तुत अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया है कि व्यावसायिक (जैसे इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन आदि) तथा गैर-व्यावसायिक (जैसे कला, विज्ञान, वाणिज्य) पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संवेगात्मक बुद्धि में किस प्रकार का अंतर पाया जाता है। अध्ययन के लिए मेरठ शहर के 600 विद्यार्थियों को नमूने के रूप में चयनित किया गया तथा सुषमा तालेशारा द्वारा निर्मित प्रश्नावली के माध्यम से आंकड़ों का संकलन किया गया। शोध के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों एवं छात्राओं की संवेगात्मक बुद्धि का स्तर गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की तुलना में अधिक पाया गया। सांख्यिकीय विश्लेषण में प्राप्त ‘क्रान्तिक अनुपात’ मान .05 स्तर पर सार्थक पाए गए, जिससे शून्य परिकल्पनाएँ अस्वीकार हो गईं और यह सिद्ध हुआ कि दोनों समूहों के बीच संवेगात्मक बुद्धि में वास्तविक अंतर विद्यमान है। इसके पीछे प्रमुख कारण व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का प्रतिस्पर्धात्मक एवं व्यावहारिक वातावरण माना जा सकता है, जहाँ विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, तनाव सहनशीलता, निर्णय क्षमता तथा सामाजिक कौशलों का निरंतर अभ्यास करना पड़ता है। इसके विपरीत, गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रम अपेक्षाकृत कम दबावपूर्ण होते हैं और उनमें सैद्धांतिक ज्ञान एवं रचनात्मकता पर अधिक बल दिया जाता है। अध्ययन का महत्व इस दृष्टि से भी है कि यह शिक्षकों, अभिभावकों एवं नीति-निर्माताओं को यह संकेत देता है कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए भावनात्मक कौशलों का विकास अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, यह शोध मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि शिक्षा प्रणाली में संवेगात्मक बुद्धि को समुचित स्थान देकर विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाया जा सकता है, बल्कि उन्हें जीवन की विविध चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने हेतु भी तैयार किया जा सकता है।
मुख्यशब्द- व्यावसायिक पाठ्यक्रम के विद्यार्थी, गैर व्यावसायिक पाठ्यक्रम के विद्यार्थी, संवेगात्मक बुद्धि

Cite this Article: 

मेना, शर्मा.  डॉ. योगेश्वर प्रसाद, व्यावसायिक एवं गैर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थिंयों की संवेगात्मक बुद्धि का तुलनात्मक अध्ययनThe Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp-211–218, Volume-05, Issue-01, April-2026, https://theresearchdialogue.com/

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