भारत में जातिवाद: एक समाजशास्त्रीय अनुशीलन
Author :डॉ. श्याम नारायण वर्मा
DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v5i1.17
सारांश-
भारतीय समाज के महत्वपूर्ण आधार स्तम्भों में जाति व्यवस्था भी सुमार रही है इसी जाति व्यवस्था का विकृत रूप जातिवाद, छुआ-छूत, भेदभाव आदि के रूप में धीरे-धीरे सामने आने लगा और आज पश्चिमीकरण, नगरीकरण, वैश्वीकरण, आधुनिकीकरण तकनीकीकरण जैसी तमाम प्रक्रियाओं के चलते भी जातिवादी जिन्न भारतीय जनमानस के केन्द्र में विशैले सर्प जैसा कुन्डली मारे बैठा है। जातिवादी सोंच और जातिवादी राजनीति आदि ने भारतीय समाज का भारी नुकशान किया है और कर रहा है जातिमुक्ति ही भारतीय समाज को अपनी आर्थिक तरक्की की राह को सहज, सुगत, सरल बना सकती है साथ ही आर्थिक तरक्की में तीव्रता ला सकती है इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए हर भारतीय को जातिगत हित से ऊपर उठकर देशहित/राष्ट्रीय हित को प्रवल समर्थन देना होगा तभी भारत विश्व में आर्थिक शक्तियों का सामना कर सकेगा अन्यथा नहीं ?
Cite this Article:
वर्मा. डॉ. श्याम नारायण ,“ भारत में जातिवाद: एक समाजशास्त्रीय अनुशीलन” The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp-150–152,Volume-05, Issue-01, April-2026, https://theresearchdialogue.com/
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