The Research Dailogue

कृषि के वाणिज्यीकरण का ग्रामीण समाज पर प्रभाव

(जनपद अयोध्या के हैरिंगटनगंज विकासखंड पर आधारित एक समाजशास्त्रीय अध्ययन)

Vol. 04, Issue 04, pp. 85–89 |  Published: 22 January 2026

Author: डा0 सन्तराम पाल

DOI: https://doi.org/10.64880/theresearchdialogue.v4i4.10

सारांश :

“भारतीय ग्रामीण समाज की मुख्य आधारशिला कृषि रही है।“1 परंपरागत भारतीय कृषि-व्यवस्था निर्वाह-उन्मुखी थी जिसमें उत्पादन का उद्देश्य पारिवारिक उपभोग तथा स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं की पूर्ति करना था। किंतु, “औपनिवेशिक काल से प्रारंभ होकर स्वतंत्रता के पश्चात हरितक्रांति के जन्म, तकनीकी विकास, बाज़ार विस्तार, वैश्वीकरण और सरकारी नीतियों के साझे परिणामस्वरूप कृषि का वाणिज्यीकरण तीव्र गति से हुआ।“2 कालांतर में “इस प्रक्रिया ने ग्रामीण समाज में न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और संरचनात्मक परिवर्तन भी उत्पन्न किए।“3 प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य कृषि के वाणिज्यीकरण के ग्रामीण समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है। अध्ययन के लिए उत्तर प्रदेश के जनपद अयोध्या के हैरिंगटनगंज विकासखंड को क्षेत्रीय इकाई के रूप में चुना गया है। यह क्षेत्र कृषि-प्रधान है जहाँ छोटे, सीमांत एवं मध्यम किसानों की बहुलता है तथा परंपरागत और आधुनिक कृषि प्रणालियाँ साथ-साथ विद्यमान हैं। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि कृषि के वाणिज्यीकरण ने जहाँ उत्पादन, आय और बाज़ार संपर्क को बढ़ाया है, वहीं सामाजिक असमानता, वर्ग-विभाजन, भूमिहीनता, पलायन, पारिवारिक विघटन और सांस्कृतिक परिवर्तन जैसी समस्याओं को भी जन्म दिया है।

मुख्य शब्द: कृषि का वाणिज्यीकरण, ग्रामीण समाज, सामाजिक परिवर्तन, हैरिंगटनगंज, अयोध्या

Cite this Article:

डा0 सन्तराम पाल, कृषि के वाणिज्यीकरण का ग्रामीण समाज पर प्रभाव (जनपद अयोध्या के हैरिंगटनगंज विकासखंड पर आधारित एक समाजशास्त्रीय अध्ययन)The Research Dialogue, Open Access Peer-reviewed & Refereed Journal, Pp.85–89.

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